जयपुर, जोधपुर से बीकानेर तक: ये हैं राजस्थान के 9 सबसे कमाऊ रेलवे स्टेशन, नंबर-1 की कमाई जानकर चौंक जाएंगे

जयपुर। हम सभी जानते हैं राजस्थान में सबसे पहली ट्रेन बांदीकुई से आगरा के बीच 20 अप्रेल 1874 को दौड़ी थी। ट्रेन सुबह 8 बजे आगरा से चली और दोपहर एक बजे बांदीकुई पहुंची थी। जब पहली बार भाप से चलने वाले इंजन की सीटी यहां गूंजी तो ट्रेन को देखने के लिए लोग उमड़ पड़े थे।

बांदीकुई को एशिया का पहला मीटर गेज जंक्शन माना जाता था, जहां ब्रिटिश काल में रेलवे का विकास शुरू हुआ। 1860 के दशक में अंग्रेज पहली बार बांदीकुई पहुंचे तो उनको यह जगह बहुत अच्छी लगी। उसके बाद अंग्रेजों ने यहां के पानी के सैंपल इंग्लैंड भेजे। जांच के नतीजों में पानी शुद्ध बताया गया। इसके बाद अंग्रेजों ने बांदीकुई को रेल विस्तार के लिए अहम माना गया और यहां के लिए ट्रेन चलाई गई।

वर्तमान में राजस्थान में सबसे बड़ा रेल नेटवर्क उत्तर पश्चिमी रेलवे का है, जो कि प्रदेश के अधिकांश हिस्से को कवर करता है। उत्तर पश्चिमी रेलवे की स्थापना 1 अक्टूबर, 2002 को की गई थी। यह जोन उत्तरी रेलवे व पश्चिमी रेलवे के 2-2 डिवीजनों का पुनर्गठन कर बनाया गया था।

उत्तर पश्चिमी रेलवे में 570 से अधिक रेलवे स्टेशन

उत्तर पश्चिमी रेलवे का मुख्यालय राजस्थान की राजधानी जयपुर में है, जिसमें जयपुर, जोधपुर, अजमेर और बीकानेर समेत 4 मंडल हैं। भारतीय रेलवे का यह जोन करीब 6,550 किलोमीटर के रेल नेटवर्क पर 570 से अधिक रेलवे स्टेशनों का संचालन करता है।

जयपुर मंडल राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों को सेवाएं प्रदान करता है। वहीं बीकानेर मंडल राजस्थान, पंजाब और हरियाणा राज्यों को सेवाएं प्रदान करता है।

जोधपुर मंडल की बात करें तो इसमें जोधपुर, पाली, मारवाड़, नागौर, जालोर, बाड़मेर और जैसलमेर के क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा, इसमें गुजरात के कुछ जिले भी शामिल हैं। अजमेर मंडल राजस्थान और गुजरात में फैला हुआ है। इस मंडल का भारत के धार्मिक और पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान है।

NWR: किस स्टेशन से होती है सबसे ज्यादा कमाई

राजस्थान के 10 सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशनों की बात करें तो इनमें सबसे पहला नाम जयपुर रेलवे स्टेशन (जयपुर जंक्शन) का है। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) शशि किरण ने बताया कि जयपुर जंक्शन उत्तर पश्चिमी रेलवे में सबसे अधिक आय अर्जित करने वाला स्टेशन है।

जयपुर जंक्शन को 1 अप्रेल 2025 से लेकर 30 नवंबर 2025 के बीच अनारक्षित टिकट प्रणाली और यात्री आरक्षण प्रणाली से कुल 580.83 करोड़ रुपए की आय हुई।

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जयपुर के बाद आय के मामले में अजमेर जंक्शन (244.93 करोड़), जोधपुर जंक्शन (240.13 करोड़), उदयपुर शहर (106.54 करोड़), बीकानेर जंक्शन (95.16 करोड़), रींगस जंक्शन (55.81 करोड़), आबू रोड (46.23 करोड़), रेवाड़ी (43.44 करोड़), अलवर जंक्शन (36.86 करोड़) और भीलवाड़ा (35.31 करोड़) का नाम आता है।

1. जयपुर जंक्शन: जब आए थे महात्मा गांधी

जयपुर जंक्शन राजस्थान का सबसे प्रमुख रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन मेट्रो से भी जुड़ा हुआ है। वर्तमान में जयपुर रेलवे स्टेशन को नया रूप दिया जा रहा है, जिसके बाद इस स्टेशन पर यात्रियों को एयरपोर्ट जैसी तमाम सुविधाएं मिलेंगी। जयपुर रेलवे स्टेशन से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे बड़े शहरों के लिए सीधी ट्रेनें मिलती हैं।

जयपुर जंक्शन. Photo Patrika

जयपुर जंक्शन की स्थापना 1875 में हुई। उस समय राजपूताना-मालवा रेलवे ने जयपुर से बांदीकुई तक रेलवे लाइन बिछाई थी। जयपुर जंक्शन पर हर दिन देश-विदेश और राज्य के अलग-अलग हिस्सों से हजारों यात्री आते-जाते हैं। 1901 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने दिल्ली से राजकोट जाते समय जयपुर जंक्शन पर विश्राम किया था। जयपुर जंक्शन के अलावा शहर के प्रमुख रेलवे स्टेशन खातीपुरा, गांधीनगर और दुर्गापुरा है।

2. अजमेर जंक्शन: हर धर्म के यात्रियों के लिए अहम

अजमेर जंक्शन हर धर्म के यात्रियों के लिए अहम है। ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह और पुष्कर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह प्रमुख रेल मार्ग है। यह स्टेशन दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई, उदयपुर, जोधपुर और जयपुर जैसे शहरों से अच्छी तरह जुड़ा है। आय के मामले में यह दूसरा बड़ा स्टेशन है।

3. जोधपुर जंक्शन: होता है मारवाड़ की शान का अहसास

राजस्थान में पर्यटन के लिहाज से जोधपुर प्रमुख शहर है। जंक्शन पर कदम रखते ही मारवाड़ की शान जोधपुर का अहसास हो जाता है। 9 मार्च 1885 को जोधपुर से लूणी के बीच पहली ट्रेन चली थी।

मेहरानगढ़ किला जोधपुर ( फोटो- पत्रिका)

वर्तमान में इस स्टेशन पुनर्विकास का काम भी जारी है। इसके बाद जोधपुर आने वाले पर्यटकों को सभी आधुनिक सुविधाएं स्टेशन पर मिलेंगी। स्टेशन पर हर दिन करीब 70 जोड़ी ट्रेनों आवागमन होता है और लगभग 40 हजार या​त्री आते-जाते हैं।

4. उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन: एक बार आ गए तो बार-बार आएंगे

झीलों की नगरी उदयपुर का यह रेलवे स्टेशन पर्यटकों को पहली झलक में ही ‘सिटी ऑफ लेक्स’ की खूबसूरती का अहसास करा देता है। उदयपुर इतना खूबसूरत शहर है कि जो एक बार यहां आ जाता है उसका बार-बार आने का मन करता है।

उदयपुर सिटी रेलवे स्टेशन पर जल्द ही पर्यटकों को विश्व स्तरीय सेवाएं मिलेंगी। इस स्टेशन पर प्रतिदिन 50 से अधिक ट्रेनों का आवागमन होता है और 20 हजार से अधिक यात्री आते और जाते हैं। आय के मामले में NWR का यह चौथा बड़ा स्टेशन है।

5. बीकानेर जंक्शन: इतिहास और विरासत का साक्षी

Photo: patrika

बीकानेर शहर आने वाले हर यात्री की यात्रा बीकानेर जंक्शन से ही शुरू होती है। वर्ष 1891 में बीकानेर को रेल सुविधा मिली थी। खास बात यह है कि बीकानेर रेलवे स्टेशन निर्माण में शहर के एक प्रसिद्ध व्यापारी ने 3 लाख 46 हजार रुपए का योगदान दिया था, जो उस समय बड़ी राशि मानी जाती थी। आज भी प्रदेश का यह स्टेशन बीकानेर के इतिहास और विरासत का साक्षी है।

6. रींगस जंक्शन: खाटू श्यामजी जाने के लिए प्रमुख पड़ाव

रींगस जंक्शन खाटू श्याम जी जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख पड़ाव माना जाता है। हर साल लाखों भक्त रींगस स्टेशन पर उतरकर दर्शन के लिए खाटू श्यामजी जाते हैं। दिल्ली, जयपुर और सीकर जैसे शहरों से आने वाली ट्रेनें यहां रुकती हैं। धार्मिक सीजन में स्टेशन पर रौनक रहती है।

खाटूश्यामजी। फाइल फोटो- पत्रिका

साधारण ढांचे के बावजूद यात्रियों की भारी आवाजाही इसे राजस्थान के सबसे व्यस्त जंक्शनों में शामिल करती है। जल्द ही रींगस से खाटू नगरी के लिए एक नई लाइन के बिछने से बाबा श्याम के दर्शन को आने वाले भक्त रींगस की जगह सीधे खाटू धाम जा सकेंगे।

7. आबू रोड: हिल स्टेशन माउंट आबू के लिए मुख्य प्रवेश द्वार

आबू रोड रेलवे स्टेशन राजस्थान के अकेले हिल स्टेशन माउंट आबू के लिए मुख्य प्रवेश द्वार है। दिल्ली, जयपुर और अहमदाबाद से आने वाली ट्रेनें यहां रुकती हैं।

माउंट आबू .नक्की झील में नौकाविहार का आनंद लेते सैलानी।

अरावली पर्वतमाला के बीच बसा यह स्टेशन गर्मी से राहत पाने वाले सैलानियों के लिए बेहद अहम है। गुजरात और राजस्थान की सीमा पर होने के कारण यहां दोनों राज्यों के यात्रियों की आवाजाही बनी रहती है।

8. रेवाड़ी जंक्शन: हरियाणा और राजस्थान को जोड़ता है

रेवाड़ी जंक्शन हरियाणा और राजस्थान को जोड़ता है। दिल्ली से नजदीक होने के कारण रेवाड़ी जंक्शन से रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं। जयपुर, बीकानेर, हिसार और दिल्ली की ओर जाने वाली कई अहम ट्रेनें यहीं से होकर गुजरती हैं।

9. अलवर जंक्शन: टाइगर देखना है तो जरूर आएं

अलवर जंक्शन भी राजस्थान के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में से एक है। यह उत्तर-पश्चिम रेलवे का ए-श्रेणी का स्टेशन है। सरिस्का टाइगर रिजर्व के नजदीक होने के कारण यह स्टेशन प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए बहुत खास है।

सरिस्का टाइगर रिजर्व (फोटो-पत्रिका)

इसके अलावा सरिस्का लेक, अजबगढ़ और भानगढ़ घूमने आने वाले सैकड़ों पर्यटक देशभर से इस स्टेशन पर पहुंचते हैं। स्टेशन से हर दिन करीब 70 ट्रेनें गुजरती हैं।

10. भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन: राजस्थान का प्रमुख औद्योगिक शहर

भीलवाड़ा की पहचान कपड़ा उद्योग को लेकर है। यह रेलवे स्टेशन व्यापार, उद्योग और यात्रियों की आवाजाही का बड़ा केंद्र है।