विधानसभा में सरकार ने कहा कि इंटर स्टेट बाघ कॉरिडोर के तहत मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और बूंदी के रामगढ़ विषधारी अभयारण्य में पांच बाघिन और 2 बाघ लाने की स्वीकृति मिल गई है। शिफ्ट करने की तैयारी चल रही है।
कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा के इस संबंध में सदन में पूछे गए अतारांकित प्रश्न पर सरकार ने लिखित उत्तर में बताया कि राजस्थान सरकार के प्रस्ताव पर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की ओर से कुल 7 बाघ-बाघिनों के ट्रांसलोकेशन की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 2 बाघों को राज्य से एवं 5 बाघिनों की अंतरराज्यीय ट्रांसलोकेशन स्वीकृति जारी की गई है।
मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से लाएंगे
सरकार ने जवाब में बताया कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार की ओर से मध्यप्रदेश के कान्हा, पेंच, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में एक बाघिन तथा रामगढ़ विषधारी टाईगर रिजर्व में दो बाघिन को शिफ्ट किए जाने की अनुमति प्रदान की है। महाराष्ट्र के तडोवा अन्धेरी एवं पेंच टाइगर रिजर्व से एक-एक बाघिन को शिफ्ट करने की स्वीकृति भी मंत्रालय द्वारा जारी की जा चुकी है।
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान से 250 चीतल लाएंगे
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व कोटा में बाघों के लिए प्रे- बेस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एएन झा डियर पार्क नई दिल्ली से 161 चीतल तथा केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर से 381 चीतल ट्रान्सलोकेट किए जा चुके हैं। वर्तमान में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर से 250 चीतल मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किए जाने की स्वीकृति जारी की जा चुकी है तथा कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। प्रे-ऑगमेंटेशन के लिए चीतल तथा सांभर चरणबद्ध तरीके से लाने की कार्रवाई की जा रही है।
हाड़ौती में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक शर्मा ने कहा कि मुकुंदरा व रामगढ़ बाघों की प्राकृतिक बसावट है, यहां की आबोहवा उनके लिए सर्वोत्तम है। टाइगर आने से हाड़ौती में पर्यटन उद्योग बढ़ेगा। इससे पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। इसलिए बाघ जल्द शिफ्ट किए जाने चाहिए।
पत्रिका इम्पेक्ट
मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और रामगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघ शिफ्ट करने को लेकर राजस्थान पत्रिका ने अभियान चला रखा है। श्रृंखलाबद्ध तरीके से समाचार प्रकाशित कर इस मुद्दे पर शासन-प्रशासन का लगातार ध्यान आकर्षित किया है। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने इंटरस्टेट कोरिडोर बाघ परियोजना के तहत कोटा-बूंदी में बाघ लाने की घोषणा की थी।