Rajasthan by-election : कांग्रेस पर एक साल में ही जनता का भरोसा और कमजोर हो गया। विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस जीती हुई दौसा सीट के अलावा झुंझुनूं व रामगढ़ में ही जमानत बचा पाई, शेष 4 सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। इन सहित उपचुनाव के 69 में से 54 प्रत्याशी ऐसे रहे, जो जमानत बचाने लायक भी वोट प्राप्त नहीं कर पाए। उधर, पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के प्रदर्शन को देखा जाए तो सात में से दो जगह खींवसर व चौरासी में कांग्रेस और रामगढ़ में भाजपा प्रत्याशी की जमानत नहीं बच पाई थी। रामगढ़ से प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान भले ही रामगढ़ से चुनाव हार गए, लेकिन वोटों के मामले में वे अन्य कांग्रेस प्रत्याशियों से आगे रहे। आर्यन को 95175 वोट मिले, जो दौसा से चुनाव जीते दीनदयाल बैरवा को मिले 75536 वोटों से भी अधिक हैं। अन्य कोई भी कांग्रेस प्रत्याशी 50 हजार का आंकड़ा पार नहीं कर पाया। इनमें से झुंझुनूं में कांग्रेस प्रत्याशी को 47577 वोट मिले।
उपचुनाव में 69 में से 54 प्रत्याशियों की जमानत जब्त
उपचुनाव के दौरान कुल 69 प्रत्याशी थे, जिनमें से सबसे अधिक 10-10 प्रत्याशियों की दौसा व खींवसर में जमानत जब्त हुई। झुंझुनूं, रामगढ़ व चौरासी तीनों जगह 8-8, देवली-उनियारा में 6, सलूम्बर में 4 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई।
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जमानत जब्त का अर्थ
कुल वोटों के छठवें हिस्से से कम वोट मिलने पर प्रत्याशी की जमानत जब्त कर ली जाती है। यह जमानत राशि प्रत्याशी को नामांकन के समय जमा करवानी होती है। जमानत के रूप में सामान्य अभ्यर्थी के लिए 10 हजार रुपए तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए 5 हजार रुपए अमानत राशि जमा कराना आवश्यक है।
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