गंभीर सच: जैसलमेर में ‘घरविहीनता’ मानसिक बीमारी का बन रहा कारण

सरहदी जिले में होमलेसनेस यानी घरविहीनता और मानसिक बीमारियों के बीच एक गहरे संबंध को पहचाना जा रहा है। मनोरोग विशेषज्ञों की मानें तो होमलेसनेस से जूझ रहे लोगों में से कई जनें मानसिक बीमारियों का सामना कर रहे हैं। इनमें अधिकांश लोग अवसाद व चिंता से ग्रस्त हैं। कई लोग जो मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं और यदि उन्हें समाज या परिवार का समर्थन नहीं मिल पाता, जिससे उनका मानसिक स्वास्थ्य और भी बिगड़ जाता है। सामने आ रहे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के अलावा, होमलेस लोग अक्सर शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं का भी सामना करते हैं। उन्हें उचित स्वच्छता, पोषण और इलाज की कमी होती है, जो उनके मानसिक स्वास्थ्य को और खराब करता है। हकीकत: समाजिक और आर्थिक प्रभाव घर विहिन व्यक्तियों को समाज में अपनी स्थिति को लेकर शर्मिंदगी और भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह उनके मानसिक स्वास्थ्य पर और भी विपरीत प्रभाव डालता है। लंबे समय तक मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोग अपनी स्थिति से बाहर नहीं निकल पाते, जिससे उनके जीवन में निराशा और अवसाद बढ़ता जाता है।

प्रभावी अभियान से मिलेंगे बेहतर परिणाम

-होमलेसनेस के खिलाफ जन जागरूकता अभियान चलाने की दरकार है, ताकि समाज में इस समस्या को लेकर संवेदनशीलता बढ़े। -प्रभावी अभियान ही होमलेस लोगों की स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं के जागरुकता लाने में सहायक होगा। जिम्मेदार तंत्र को भी इस दिशा में सहायता प्रदान करने के लिए प्रेरित करेगा।

जरूरी यह भी

सामाजिक कार्यकर्ता पंकज केवलिया बताते हैं कि होमलेसनेस की समस्या के संबंध में केवल आश्रय उपलब्ध कराने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य पर भी काम करना होगा, ताकि लोग अपने जीवन को पुन: ठीक तरीके से जी सकें और समाज में उनका समावेश हो सके।

परेशानियां अपार

पर्यटन उद्योग में काम करने वाले लोग और दैनिक मजदूरी करने वाले लोग, जो स्थिर घर नहीं बना पाए, इस समस्या का सामना कर रहे हैं।

बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। बच्चों को शिक्षा से वंचित रखा जाता है और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ता है।

-मानसिक स्वास्थ्य, पुनर्वास और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

एक्सपर्ट व्यू: मानसिक स्वास्थ्य और होमलेसनेस के बीच एक स्पष्ट संबंध

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. जितेन्द्र नाराणिया बताते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य और होमलेसनेस के बीच एक स्पष्ट संबंध है। जिन लोगों के पास स्थिर घर और परिवार नहीं होता, उनमे कई लोगों में मानसिक स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह एक चक्रीय प्रक्रिया बन जाती है, जिसमें मानसिक बीमारी घरविहीनता की ओर ले जाती है, और घरविहीनता मानसिक बीमारियों को और बढ़ावा देती है। इन लोगों में मानसिक अवसाद और नकारात्मकता घर कर लेती है। यदि सामाजिक सहयोग न मिले तो और अधिक निराशाजनक स्थिति हो जाती है।

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