कीमतें आसमान पर, लहसुन हुआ 400 पार

भवानीमंडी. इन दिनों लहसुन की कीमतें आसमान छू रही है। आम आदमी लहसन खाना तो दूर कि बात है, उसके भाव तक नहीं पूछ रहे है।

भवानीमंडी. इन दिनों लहसुन की कीमतें आसमान छू रही है। आम आदमी लहसन खाना तो दूर कि बात है, उसके भाव तक नहीं पूछ रहे है। जो लहसन काम में भी नही लिया जाता है वह भी 100 रूपए किलो से अधिक ऊंचे भाव में बिक रहा है। बाजार में 50 से 100 रुपए किलो मिलने वाला लहसुन इस बार 300 से 400 रुपए प्रति किलो मिल रहा है। वहीं नया वाला प्याज 10 रूपए किलो से 30 रूपए किलो तक बिक रहा है, पुराना प्याज 60 रुपए किलो है, जिससे रसोई में सब्जी का छोंक महंगा पड़ रहा है। जानकारों के अनुसार इस बार लहसुन की फसल कम होने और मंडी में दलालों की ओर से लहसुन का स्टॉक करने के कारण इसके भाव में तेजी बनी हुई है।

दलाल और स्टॉकिस्टों को फायदा-
प्रदेश में हाड़ौती के कोटा और बारां में लहसुन की बपर पैदावार होती है। वहीं, चित्तौडगढ़़ और इससे सटे मालवा क्षेत्र में भी इसी पैदावार होती है।इस बार लहसुन का बीज 300 से 400 रुपए किलो मिल रहा था, फिर भी लहसन कि बुवाई पहली बार किसानों ने ज्यादा कि है। बाजार में लहसुन के दाम अधिक जरूर हैं, लेकिन इसकी कीमत किसानों तक नहीं पहुंच रही है। मंडी के दलाल और स्टॉकिस्टों को लहसुन की बढ़ी हुई कीमतों का फायदा हो रहा है।
इस बार अधिक बुवाई-
भवानीमंडी कृषि विस्तार उप जिले में भी लहसुन की अच्छी-खासी पैदावार होती है। बीते दो साल से लहसुन के बीज के दाम तेज रहने से किसान बुवाई कम रहे हैं। लेकिन इस वर्ष किसानों को भी भाव अच्छे मिलने के कारण ज्यादा कर बुवाई लहसन की करी है। दो साल पहले 50 रुपए किलो थे भाव- दो साल पहले लहसुन पचास रुपए किलो में मिल रहा था। मंडी में भाव और भी कम थे। वर्ष 2023 और 2024 को छोड़ दें तो बीते सालों किसानों को लहसुन के बुवाई के दाम भी नहीं मिल रहे थे। जिसके कारण उन्हें घाटा उठाना पड़ रहा था। इस बार 25 प्रतिशत बुवाई कम हुई, तो दाम बढ़ गए।

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