अंकितराज सिंह चन्द्रावत, नीरज
कोटा। कोचिंग सिटी कोटा में नशे का जहर तेजी से फैल रहा है। देश भर से कोटा में आए स्टूडेंट्स ड्रग्स माफिया का सॉफ्ट टारगेट बन रहे हैं। ड्रग कैरियर पहले पहले बच्चों की रोजमर्रा के कामों में मदद कर उनका विश्वास जीतते हैं, फिर पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ाने की ‘गोली’ के बहाने उन्हें ड्रग्स से जोड़ देते हैं। पहले हफ्ते-15 दिन में एक पुडिया या गोली से बात शुरू होती हैं, फिर धीरे धीरे लत बन जाती है।
ड्रग्स सप्लायर्स ने कोचिंग और हॉस्टल बाहुल्य क्षेत्र के आसपास ठिकाने बना रखे हैं, जहां से एक कॉल पर ड्रग्स सप्लाई की जाती है। कोटा में अलग-अलग इलाकों में एमडी, गांजा, स्मैक और चरस के अलग-अलग कोडवर्ड भी चलन में हैं। पुडिय़ा, बंशी, टिकट, बच्चा, माल, ट्यूब, पन्नी, पीपी और डिब्बा जैसे कोडवर्ड में नशे का कारोबार होता है। यहां 200 रुपए में तक गली-गली नशा बिक रहा है। शहर में रोजाना 40 से 50 लाख का नशा बिकता है।