हनुमानगढ़. जिले में डीएपी की मांग लगातार बढ़ रही है। लेकिन आवक नामात्र हो रही है। कृषि विभाग स्तर पर किसानों को स्पष्ट कर दिया गया है कि किसान डीएपी के भरोसे नहीं रहें। नैनो यूरिया सहित डीएपी के अन्य विकल्प का उपयोग करने की सलाह विभाग स्तर पर दी जा रही है।
इस बीच खाद वितरण व्यवस्था को लेकर कृषि विभाग लगातार निरीक्षण कर अनियमितता पर सख्त कार्रवाई कर रहा है। विभाग ने गुरुवार सुबह हनुमानगढ़ जंक्शन में एक आदान विक्रेता फर्म का लाइसेंस निरस्त और धोलीपाल में एक का लाइसेंस निलंबित किया है। विभाग के संयुक्त निदेशक योगेश वर्मा ने बताया कि विभाग की टीमें उर्वरकों की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए औचक निरीक्षण कर रही है।
संयुक्त निदेशक ने बताया कि जिले में फास्फोरस के वैकल्पिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। किसी जगह अधिक राशि पर ब्रिकी की सूचना निकटतम सहायक निदेशक अथवा कृषि पर्यवेक्षक को दी जाए। ताकि प्रभावी कार्यवाही संभव हो सके। उन्होंने बताया कि जिले में कोरोमंडल, इफको एवं एनएफएल की रैक से 2300 मैट्रिक टन गत दो दिन में आया है। इससे स्थिति में सुधार हुआ है। वर्मा ने आदान विक्रेताओं को डीएपी उर्वरक की आपूर्ति के बाद मंडीवार वितरण व्यवस्था में नियुक्त कार्मिकों की देखरेख में ही किसानों को आनुपातिक रूप से उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
पर्याप्त मात्रा में फास्फोरिक जनित उर्वरक उपलब्ध
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक योगेश वर्मा ने बताया कि इस बार रबी में लगभग 6.70 लाख हैक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से अक्टूबर तक सरसों लगभग 2.50 लाख हैक्टेयर में बिजाई होने का अनुमान है। इसके लिए लगभग 15000-18000 मैट्रिक टन फास्फोरस की आवश्यकता होगी। उन्होंने किसानों को बताया कि एनपीकेएस श्रेणी के उर्वरक, सिंगल सुपर फास्फेट, ट्रिपल सुपर फास्फेट आदि की पर्याप्त व्यवस्था है। नवम्बर माह में गेंहू की बिजाई के लिए भी पर्याप्त मात्रा में फास्फोरिक जनित उर्वरक उपलब्ध है।
इनसे भी अच्छे परिणाम
संयुक्त निदेशक ने बताया कि सामान्यत तीन कट्टे एसएसपी एवं एक कट्टा यूरिया के उपयोग से डीएपी से भी अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। इसी प्रकार एनपीकेएस श्रेणी के विभिन्न ग्रेड के उर्वरक 6800 टन उपलब्ध है। इनकी निरन्तर आपूर्ति हो रही है। ऐसे में किसी भी प्रकार से भ्रमित नहीं हो।