हिण्डौनसिटी. जिले के अन्य बांधों से खेतों की सिंचाई के लिए नहरों में पानी कल-कल बह रहा है, लेकिन लबालब के करीब पहुंचे जगर बांध को लेकर अभी संशय बना हुआ है। जल संसाधन विभाग ने न तो बर्षों से बदहाल पड़ी नहरों की मरम्मत करवाई है और न ही बांध से पानी खोलने के लिए प्रशासन ने क्षेत्र की जलग्रहण समितियों की बैठक बुलाई है।
दरअसल इस बर्ष मानसून के मेहरबान रहने पर कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश होने से जगर बांध ढाई दशक यानी 26 साल बाद लबालब होने के करीब पहुंचा था। 30 फीट भराव क्षमता के इस बांध में वर्ष 1998 के बाद 28.6 फीट जलभराव हुआ। जबकि वर्ष 2016 में 26.6 फीट गेज रहा। वर्षों बाद बांध में खूब जलभराव होने से जलसंसाधन विभाग की ओर से नहरों में पानी खोलने से पूर्व की तैयारियां शुरू कर दी। नहरों की मरम्मत और रखरखाब के लिए डेढ़ माह पहले विभाग के जयपुर मुख्यालय व मनरेगा के तहत कार्यों के लिए करीब सवा करोड़ रुपए के प्रस्ताव भिजवाए थे। वहीं उपखंड अधिकारी कार्यालय में बांध से नहरों में पानी खोलने के को लेकर जलग्रहण समितियों की बैठक बुला निर्णय करने का पत्र भी भेजा गया था। लेकिन खेतों में सिंचाई के एक दौर निकलने के बावजूद अभी तक न तो नहरों की मरम्मत के लिए न तो बजट ही स्वीकृत हुआ और न ही जलग्रहण समितियों की बैठक में बांध से पानी छोडऩे पर चर्चा हो सकी है।
बजट मिले तो नहरों का हो रखरखाब
जगर बांध से निकल रही 44 किलोमीटर लम्बी मुख्य नहर व माइनर कैनाल व रखरखाब के अभाव में बदहाल पड़ी है। सिल्ट और कचरा-मिट्टी से अटी नहरें दर्जनों स्थानों पर टूटी हुई है। वहीं बांध की मोरी से अंतिम छोर तक झाडिय़ों से अटी है। विभागीय सूत्रोंं का कहना है कि राशि स्वीकृत हो नहर की मरम्मत व रखरखाब का कार्य शुरू हो।
16 वर्ष बाद नहरों से सिंचाई आस
जगर बांध में पर्याप्त भराव नहीं होने से 16 वर्ष से नहरें सूखी पड़ी हैं। इस बार पर्याप्त जलभराव होने से नहरों में पानी खोले जाने की उम्मीद है। जल संसाधन विभाग के सूत्रों के अनुसार नहरों में 13 नवम्बर 2008 के बाद पानी नहीं छोड़ा गया है। हालांकि नहरों में पानी छोडऩे के दौरान बांध में गेज 16.8 फीट था।
6265 हैक्टेयर है सिंचित सिंचित क्षेत्र
जगर बांध के सिंचाई क्षेत्र में 26 गांव शामिल हैं। इस गांवों में बांध से मुख्य नहर सहित आठ माइनर नहरों निकल कर रही है। जो बांध से पानी छोडऩे पर 6265 हैक्टेयर भूमि को सिंचित करती हैं। 44 किलोमीटर लम्बी नहर में 18 किलोमीटर मैन कैनाल व 26 किलोमीटर की आठ माइनर कैनाल हैं। जिनसें गांवों में पानी पहुंचता है।
इनका कहना है
इस बार बांध में पर्याप्त जल भराव हुआ है। बजट स्वीकृति नहीं मिलने से अभी नहरोंं की मरम्मत नहीं हो सकी है। जलग्रहण समिति व प्रशासन नहरों में पानी छोडऩे का निर्णय करता है।
उम्मेदसिंह, कनिष्ठ अभियंता, जल संसाधन विभाग, हिण्डौनसिटी
किसानों की ओर से अभी नहरों से सिंचाई को लेकर कोई मांग नहीं आई है। यदि नहरी क्षेत्र से ऐसी मांग आएगी तो जिला कलक्टर के निर्देशानुसार जलग्रहण समितियों की बैठक लेकर निर्णय किया जाएगा।
हेमराज गुर्जर, एसडीएम, हिण्डौनसिटी.