गर्म कपड़ों से सजी दुकानें, पहुंचने लगे खरीदार, रजाइयां भी होने लगी तैयार…VIDEO

नागौर. माह के दूसरे सप्ताह में अब मौसम में ठंड का रंग घुलने के साथ ही गर्म कपड़े बाहर आने लगे हैं। हालांकि दोपहर को मौसम सामान्य रहता है, लेकिन शाम को पांच बजे के बाद तेज हवाओं के साथ चल रही हल्की ठंडक की वजह से अब सर्दी का एहसास होने लगा है। मौसम के बदलते रंग के साथ ही जैकेट, स्वेटर, गर्म शर्टें अब पहने हुए लोग नजर आ रहे हैं। बाजारों में भी विभिन्न प्रकार के स्टाइलिश गर्म कपड़ों से दुकानें सज चुकी है।
जैकेट फुल, हाफ, स्वेटर से सजी दुकानें
सर्दी की शुरुआत के साथ ही अब गर्म कपड़ों का बाजार भी गर्म होने लगा है। बाजार में अब गर्म शर्ट, पैंट, प्लाजो, लेडीज सूट, कुर्ती, शाल, स्वेटर, जैकेट सहित अन्य वैरायटी के कपड़ों से सजी दुकानों पर अब खरीदार पहुंचने लगे हैं। कोट, मफलर, गर्म शाल, स्वेटर, जैकेट के साथ हाफ, फुल, चैन और बटन वाली जैकेट बाजार में उपलब्ध है। इसके साथ ही हर साल बाहर से आने वाले नेपालियों ने भी अपनी दुकानें सजा ली है। इनका तो पूरा गर्म कपड़ों का अलग से बाजार ही बस गया है। शहर के गांधी चौक, सदर बाजार, सुगन सिंह सर्किल, दिल्ली दरवाजा के साथ ही शहर के शापिंग मॉल भी अब गर्म कपड़ों से पूरी तरह सज्जित हो गए हैं। लेदर जैकेट की मांग युवाओं में ज्यादा है। इसकी शुरुआत ही एक हजार से लेकर दो से तीन हजार तक मिल रहे हैं। स्वेटर भी छह सौ से लेकर पंद्रह सौ रुपए तक मिल रहे हैं। ऊनी मफलर, स्कॉर्फ आदि भी तीन सौ से चार सौ तक की शुरुआती रेंज में मिल रहे हैं। अच्छी गुणवत्ता के साथ बेहतर कपडें के संग इसकी वैल्यू एक हजार तक की बताई जा रही है।
रजाई-गद्दे की भराई ने पकड़ी तेजी
शहर के काजियों का चौक में सडक़ के किनारे रजाई गद्दे की भराई का काम भी शुरू हो गया है। लोगों ने रजाई-गद्दा खरीदना शुरू कर दिया है। कुछ लोग रजाई-गद्दा ऑर्डर देकर बनवा रहे हैं। दुकानदार बुंदू का कहना है कि एक रजाई में कम से कम पांच किलो रुई की आवश्यकता होती है। जिले में 70, 80, 200 व 250 रुपये प्रति किलो रुई बेची जा रही है। 800-1000 रुपये से रजाई की कीमत शुरू है। इसके बाद गुणवत्ता के आधार पर इसकी कीमत बढ़ भी जाती है। दुकानदारों की माने तो लोग पुरानी रजाइयों की रूइयां निकलवाकर उन्हीं पुरानी रूई की रजाइयां बनवाने में भी खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। व्यसायियों का मानना है कि जीएसटी के दायरे में आने से भी इसकी दर बढी है। कारण है कि अच्छी रूइयां एवं रूइयों से बनी रजाइयां नोखा एवं पाली से मंगाई जा रही है। खासकर पाली की रूई की गुणवत्ता में बेहतर होने के कारण इसकी कीमत भी थोड़ी ज्यादा है।
कंबलों की भी बढ़ी मांग
बाजारों में रजाई, गद्दों के साथ ही कंबलों का बाजार भी गर्म होने लगा है। कंबल भी एक हजार से लेकर चार से पांच हजार तक की रेंज में बाजारों में उपलब्ध हैं। दुकानों पर कंबलों की भी खासी बिक्री हो रही है। इसके साथ ही सडक़ किनारों पर कंबलों के बंडल सजाकर बिक्री करने वाले दुकानदार भी पहुंच चुके हैं। यह भी सात सौ से लेकर पंद्रह सौ, दो हजार एवं तीन हजार तक के कंबल उपलब्ध करा रहे हैं। इनके पास स्टालिश जैकेट भी है। ठंड से परेशान खरीदार इनके यहां पर गर्म कपड़ों की खरीद करते नजर आने लगे हैं।

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