दावे का हिंदी अनुवाद मांगा, चेक रिपोर्ट में मिली कई कमियां

– ‘दरगाह में मंदिर’ के मामले पर 25 नवम्बर को होगी सुनवाई

अजमेर. ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह परिसर को ‘भगवान संकट मोचन महादेव विराजमान मंदिर’ बताने व दरगाह कमेटी का अनाधिकृत कब्जा हटाने संबंधी वाद में बुधवार को सक्षम अदालत में सुनवाई नहीं हो सकी। पत्रावली की जांच (चेक रिपोर्ट) में कई कमियां निकलीं। वादी की ओर से अंग्रेजी में मूल वाद प्रस्तुत करने पर दावे का हिंदी रूपांतरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसके साथ ही प्रतिवादीगण के पते को पुष्ट करने वाले दस्तावेज मय शपथ पत्र लगाने होंंगे। प्रतिवादीगण को जारी करने वाले नोटिस प्रपत्र भी भरकर देने होंगे। इन कमियों को पूरा करने के बाद प्रकरण में दोबारा सुनवाई होगी। आगामी पेशी 25 नवम्बर दी गई है।

इससे पहले मंगलवार को गत पेशी पर प्रकरण अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से वापस लेकर सक्षम अदालत सिविल न्यायाधीश (कंख.) पश्चिम में पेश किया गया। प्रकरण में सुनवाई बुधवार को हुई। इसमें कमियां सुधारने के आदेश दिए गए हैं।

दो माह पूर्व किया था वाद

हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने वकील शशि रंजन सिंह के जरिए अजमेर की सीजेएम कोर्ट में 25 सितम्बर को दायर किया था। यहां से प्रकरण वाद एसीजेएम(संख्या- तीन) की अदालत में ट्रांसफर किए जाने पर क्षेत्राधिकार का मु्ददा आने पर वादी ने सेशन न्यायाधीश की अदालत में अर्जी दायर की थी। जिसे खारिज करते हुए उसे सक्षम अदालत में वाद प्रस्तुत करने को स्वतंत्र किया था। जिसके बाद वादी की ओर से गत मंगलवार को सिविल न्यायाधीश (कंख.) पश्चिम की अदालत में वाद प्रस्तुत किया गया।

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