इस दिन धन त्रयोदशी यानी धनतेरस के दिन त्रिग्रही योग, त्रिपुष्कर योग, इंद्र योग, लक्ष्मी नारायण योग, शश महापुरुष राजयोग धाता योग, सौम्य योग सहित कुल सात प्रकार के अति शुभ
-लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, कौरी, कमलगट्टा, धनिया, हल्दी गांठ, मिट्टी के पात्र, सोना, चांदी, पीतल, तांबा, कांसा, स्टील और अष्टधातु के बर्तन, वस्त्र, सजावटी वस्तु, भूमि-भवन, वाहन आदि की खरीदारी शुभ
नागौर. धनतेरस दुर्लभ शुभ संयोगों के बीच मंगलवार को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष 100 साल के बाद अतिशुभ दुर्लभ शुभ संयोगों के बीच धनतेरस का पर्व पड़ रहा है। पंडित सुनील दाधीच के अनुसार धन त्रयोदशी यानी धनतेरस के दिन त्रिग्रही योग, त्रिपुष्कर योग, इंद्र योग, लक्ष्मी नारायण योग, शश महापुरुष राजयोग धाता योग, सौम्य योग सहित कुल सात प्रकार के अति शुभ संयोग बन रहे हैं। यह संयोग पूरे सौ साल के बाद आए हैं। लक्ष्मी-नारायण योग – धनतेरस के दिन वृश्चिक राशि में शुक्र और बुध एक साथ विराजमान रहेंगे। ऐसे में लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। पंडित दाधीच ने बताया कि धनतेरस पर बन रहा है शुभ संयोग बुध वृश्चिक राशि में गोचर करेगे बुध के गोचर से वृश्चिक राशि में धनलक्ष्मी योग बन गया है। यह बेहद कल्याणकारी रहने वाला है इस राशि में पहले से शुक्र विराजमान है। वृश्चिक राशि में बुध के गोचर से इस राशि में बुध तथा शुक्र की युति बनेगी। इससे धन लक्ष्मी योग या लक्ष्मी नारायण योग का निर्माण होगा। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार धन लक्ष्मी योग बहुत ही कल्याणकारी होता है। कुण्डली में ऐसे योग अति शुभ की श्रेणी में आते हैं। बुध और शुक्र के प्रभाव के कारण व्यक्ति के जीवन में अच्छा लाभ मिलता है। उन्हे धन की कमी नहीं होता है बुध को वाणी का ग्रह कहा जाता है बुध वाणी के साथ व्यापार में लाभ देते है।
धनतेरस पर शुभ योगों का यह रहेगा समय
पंडित दाधीच ने बताया कि इंद्र योग को 28 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 47 मिनट से लगेगा, और 29 अक्टूबर को, सुबह 7 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इसी तरह से त्रिपुष्कर योग 6 बजकर 51 मिनट से 29 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगा।
शुभ योगों में पूजन में लगेगी यह सामग्री
नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है। इस महासंयोग में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर महाराज की पूजा करने से जातक की धन-दौलत में वृद्धि होती हैं। मान्यता है कि धनतेरस के दिन पूजा हमेशा संपूर्ण सामग्रियों के साथ करनी चाहिए। इससे परिवार पर देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती हैं। इसमें रोली, अक्षत, देशी गाय का घी, शक्कर या गुड़, धूप, गंगाजल, दीपक, लकड़ी की चौकी, लाल या पीले रंग का कपड़ा, रूई, पूजा का थाल, कलश, मौली, कपूर, पुष्प, फूल और माला, मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की तस्वीर होनी चाहिए। पूजा का शुभ समय शाम को प्रदोष वेला वृषभ लग्न में 6 बजकर 41 मिनट से 8 बजकर 38 मिनट तक रहेगा।
ऐसे कर सकते हैं पूजन
धनतेरस के दिन शाम के समय कुबेर देव और माता लक्ष्मी की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उसके बाद धन्वंतरि देव, माता लक्ष्मी और कुबेर देवता के सामने घी का दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद उन्हें फल और फूल चढ़ाएं। फिर माता लक्ष्मी और कुबेर देव को उनका प्रिय भोग लगाएं।
तेरह गुना की की बढ़ोत्तरी
इस दिन शुभ मुहूर्त में पंच द्रव्य की खरीदारी करने से धन में 13 गुनी वृद्धि होती है। लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति, कौरी, कमलगट्टा, धनिया, हल्दी गांठ, मिट्टी के पात्र, सोना, चांदी, पीतल, तांबा, कांसा, स्टील और अष्टधातु के बर्तन, वस्त्र, सजावटी वस्तु, भूमि-भवन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खरीदारी होगी। इस दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की पूजा उत्तम स्वास्थ्य की कामना से होगी।
धनतेरस पर इसकी है मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन सोना-चांदी से बने आभूषण खरीदना बेहद शुभ होता है। इससे घर में बरकत व खुशहाली बनी रहती हैं। धनतेरस के दिन लक्ष्मी चरण को घर लाना और भी लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी के चरणों को घर में लाना उन्हें घर में निमंत्रण देने के समान होता है। इससे देवी प्रसन्न होती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन खड़ा धनिया खरीदना बेहद शुभ होता है। इसे घर लाने के बाद धन की देवी मां लक्ष्मी और कुबेर देवता के चरणों में अर्पित करना चाहिए। इससे व्यापार में धन लाभ के योग बनते हैं। मत्स्य पुराण के अनुसार धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने से घर में बरकत होती हैं। हिंदू धर्म में झाडू़ को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। इसकी खरीदारी से आर्थिक लाभ की संभावना बनी रहती हैं। धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति खरीदना बेहद शुभ होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि का वास बना रहता है।