मूर्तिराम महाराज के निर्वाण महोत्सव के तहत भक्ति संध्या कल
कुचेरा (नागौर). करुणामूर्ति धाम भादवासी में मूर्तिराम महाराज के 24 वें निर्वाण महोत्सव के तहत चल रही नव दिवसीय भागवत कथा के दौरान सोमवार को संत हेतमराम महाराज ने कृष्ण की बाल लीला का वर्णन सुनाया।
उन्होंने कहा कि भगवान को मां यशोदा हजारों नौकर चाकर होते हुए भी अपने हाथों से माखन खिलाती थी, यानी भक्ति की तीन धराएं है, मनसा, वाचा, कर्मणा। मन में यशोदा चिंतन करती है, लाला को अपने हाथ का ताजा माखन खिलाऊ, वाचा भक्ति, अपने मुख से बोलती जाती है, कब लाला उठेगा, कर्मणा… अपने हाथों से स्वयं दधी मंथन करती है। जब मनुष्य जीवन में हम मनसे, वचन से और कर्म से इस तीन प्रकार की भक्ति को अपना लेंगे तो, परमात्मा कृष्ण ने जिस प्रकार यशोदा को यस प्रदान किया अपनी सेवा का, वैसा यस हमें भी प्रदान हो जाएगा। संत ने कहा कि भागवत कथा जीवन को सफल और सार्थक बनाने का सूत्र है। यह संयमित एवं मर्यादित जीवन जीने की प्रेरणा देती है। सत्संग से संस्कार तथा भागवत से भगवान मिलते हैं। उन्होंने कहा कि कभी भी गोमाता एवं ब्राह्मण का तिरस्कार नहीं करना चाहिए । पाप से कमाया धन मनुष्य को शांति नहीं दिला सकता। धर्म से कमाया धन ही मनुष्य का जीवन श्रेष्ठ बना सकता है। संत नेमीराम महाराज ने छप्पन भोग लगाकर भक्तों में प्रसाद वितरण किया।
भक्ति संध्या कल
बुधवार शाम को भजन संध्या होगी। इसमें कई संतजन प्रवचन व कीर्तन करेंगे।गुरुवार को सुबह सवा 8 बजे मूर्तिराम महाराज की समाधि की पूजा होगी। गुरुवाणी का पाठ व पूर्णाहुति की महाआरती होगी। उसके बाद महाप्रसादी का आयोजन होगा।