हिण्डोली. कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑपरेशन थिएटर में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के चलते लाखों रुपए की ऑपरेशन मशीन धूल फांक रही है, जिनमें से कई मशीन खराब तक हो चुकी है।
जानकारी अनुसार कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तीन दशक पूर्व क्रमोन्नत हुआ था। उसके बाद से यहां का विकास पर्याप्त नहीं हो पाया। विगत एक दशक पूर्व राज्य सरकार द्वारा यहां पर आपरेशन थियेटर प्रशासन का निर्माण करवाया था, जिसमें निर्माण के बाद ऑपरेशन के लिए लाखों रुपए की लागत की मशीनें खरीद कर यहां भिजवाई थी, लेकिन कई मशीनें ऐसी है जिनका एक बार भी उपयोग नहीं हो पाया है। ऐसे में वे मशीन भी यहां पर एक दशक से धूल फांक रही है।
चिकित्सालय सूत्रों की माने तो यहां पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद वर्षो से रिक्त चल रहे है। यहां पर चिकित्सक नहीं लगाने के कारण क्षेत्र के रोगी उपचार के लिए कोटा या बूंदी जाने को विवश रहते हैं। जबकि यहां पर चिकित्सक लगाने की मांग में लेकर कई बार ग्रामीणों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री, चिकित्सा मंत्री से मांग की है।
ट्रोमा चिकित्सालय की बरसों से दरकार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिण्डोली में दो राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 52 व 148 डी लगते हैं। 148 डी में इन दिनों ट्रैफिक का काफी दबाव होने के कारण यहां पर सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। वहीं एनएच 52 में भी आए दिन सड़क दुर्घटना होती हैं।
ऐसे में यहां पर घायलों को एंबुलेंस से हिण्डोली चिकित्सालय लाया जाता है, लेकिन यहां पर सर्जन, ऑर्थो के अभाव में रोगियों को यहां से सीधे ही बूंदी या देवली रेफर कर देते हैं। ऐसे में बीच में कई बार घायलों का अधिक रक्तस्राव के कारण मौत हो जाती है।ऐसे में यहां पर लंबे समय से ट्रोमा चिकित्सालय की मांग चली आ रहे हैं। पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने भी हिण्डोली में ट्रोमा चिकित्सालय की आवश्यकता बताते हुए चिकित्सा उपनिदेशक कोटा को प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भिजवाने को कहा था। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021-22 में हिंडोली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ट्रोसा चिकित्सालय की स्वीकृत हुआ था, लेकिन यहां से नैनवां में स्थांतरित कर दिया था।
विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि यहां पर सर्जन, फिजिशियन ,ऑर्थो, गायनिक सहित पांच विशेषज्ञों के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। ऐसे में सड़क दुर्घटना में आने वाले घायलों को भी यहां पर तत्काल प्रभाव से बूंदी रैफर कर दिया जाता है। जबकि यहां पर विशेषज्ञ होते तो कई घायलों का ऑपरेशन होकर उनकी जाने बचाई जा बच सकती हैं।
इनका कहना है
चिकित्सालय में ऑपरेशन थिएटर बना हुआ है। मशीनें भी है, लेकिन यहां पर सर्जन, ऑर्थो, गायनिक की कमी के चलते घायलों का ऑपरेशन नहीं हो पाता है। ऐसे में ओटी बंद रहता है ।
रमेश चंद्र कुशवाहा, प्रभारी चिकित्सालय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हिण्डोली